Tuesday, December 11, 2012

मैंने सोचा पूछु एक दिन........

मैंने सोचा पूछु एक दिन,

अन्दर के अंधेरो को चीर के,

वो क्या है जो दिखाई नहीं देती,

वो क्या है जो सिर्फ महसूस होती,

लौ की भाँती जलती जाती,

पानी सी वो बहती जाती,

हवाओं में सम्मिलित है,

पर हवाओं से वो भिन्न है।



मैंने सोचा पूछु एक दिन,

अन्दर के साहस को बटोर के,

ये कौन सी शक्ति है,

जो मेरी है तो नाजुक है,

जो मेरी है तो भावुक है,

जो अलग हुई तो बलवान है,

जो मेरी नहीं तो अनजान है।



मैंने सोचा पूछु एक दिन,

अन्दर की शंकाएं जोड़ के,

ये कौन सी शंका है,

जो सोचो तो डरावनी है,

जो समझो तो कहानी है।

जब सोचा उसको तो हिम्मत लगी,

जब समझा उसको तो अपनी लगी।



जोड़ा जब इन अर्थों को,

तोडा जब इन संधियों को,

तो पाया जो ना सच के जैसा था,

जो ना झूठ से परे था.

कुछ अजीब, कुछ सजीव,

वो बिलकुल मेरे जैसा था.

वो उत्तर तो बस एक प्रश्न मात्र था,

वो प्रश्न सिफर मात्र था।

वो कुछ मेरे ही जैसा था,

प्रश्नों की गुत्थी में उलझा उत्तर,

हू -बहु मेरे जैसा था……….. 

Tuesday, December 4, 2012

Finally U are here,finally Everthing is clear....

Finally you are here,
Finally you are near.
So divine and strong,
So pure and clear.

No hidden mysteries,
No buried secrets.
No more turning back,
No more awaiting concepts.

He said turn back one more time,
One more time rewind and refine.
From here there is no turning back
There is no walking ahead.

I felt the cold in his blue eyes,
I felt the warmth in his blooded eyes.
Surprised and amused,
Pushed against the wall,
I was left with no way.


Confused, happy, sad and still,
Blocking my path were these devils.
No I said leave me and let me feel,
Let me feel the confused happiness,
Let me feel the still sadness.

Suddenly everything moving,
Everything running so fast
I can hear sum one at distance weeping so loud.
I turned back and saw, Oh! It was not me,
It was not me, for whom they are sad,
He is someone else and yes I am glad.

I am glad coz I am now free,
No more joys, no more worries.
No more obligations, no more pleas.
No more fear and sorrows of detachments,
No more joys and happiness of attachments.

Above all now I am who I am,
No outline, no norm,
No guilt no form.
Above from further ends,
Above from dead ends,
Above from fear of sinking and burning thoughts,

Above from split and rejoining thoughts,
Now everything is black,
I welcome you death.

Finally everything is clear....

Saturday, November 24, 2012

गिला नहीं...............।


इतने तारे हैं आसमान मे,
एक तारा टुटा तो  गिला नहीं।
इतने चाँद हैं छुपे हुए बादलों मे,
एक चाँद रूठा तो गिला नहीं।
वक़्त धीरे धीरे कट जायेगा,
जख्म भी ये भर जायेगा,
इतने बाँध है दिल में रुके हुए,
एक बाँध छूटा तो गिला नहीं।

इतने शख्स  मिलते हैं राहों मे,
एक शख्स खोया तो गिला नहीं। 
इतने मरासिम बनते है सालों मे,
एक मरासिम भूला तो गिला नहीं।
रास्ते आगे बढ़ जायेंगे,  
निशाँ सारे मिट जायेंगे,
राहें तो मिलती जाती हैं,
एक राही पीछे छूटा तो गिला नहीं।

Friday, October 19, 2012

ये कैसी है तेरी माया, तुने कैसे बनायीं काया.........

ये कैसी है तेरी माया,
तुने कैसे बनायीं काया.
सबसे भिन्न सबसे अलग,
फिर भी सबके जैसा.
रूप, रंग सबसे अलग,
स्वाभाव न एक जैसा.
फिर भी एक सी छाया,
तुने कैसे बनायीं काया.

जन्म की दी तुने ताकत,
साँसों को एक तार किया,
पर मृत्यु का न अधिकार दिया.
कैसा ये षड़यंत्र रचा,
कैसा ये खेल खिलाया.
ये कैसी है तेरी माया,
तुने कैसे बनायीं काया.

सुख दिया, दुःख दिया,
जाहिर करने का मार्ग दिया.
अंतहीन अंधेरो में जो
दिख जाए वो प्रकाश दिया.
इस जटिल गुत्थी को तुने
दो भागो में बाँट दिया,
जो समझ गया वो जीत गया,
जो ना समझा वो हार गया.
ये कैसी है तेरी माया,
तुने कैसे बनायीं काया.

Friday, October 5, 2012

मैं कौन हूँ, मैं क्या हूँ.........



मैं कौन हूँ, मैं क्या हूँ,
अपने अस्तित्व से परेशान हूँ.
मैं खुश हूँ, मैं उदास हूँ,
अपने जज्बातों से परेशान हूँ.

तू मुझे बार बार सिखाती है ज़िन्दगी,
तू मुझे बार बार रुलाती है ज़िन्दगी,
मैं अपने हालातों के कश्मकश से परेशान हूँ.

मुकम्मल नहीं लगता मुझे अब कभी ये हो पायेगा,
मैंने जो खो दिया वो कभी लौट आएगा,
मैं इस पाने खोने की जद्दोजहद से परेशान हूँ.

सजदे किये मैंने लाखों बार,
दुआएँ की एक मरासिम को बचाने के लिए,
मैं इस मरासिम के बार बार बचने से परेशान हूँ.

मेरे हालात मेरे रकीब वहीँ हैं,
दिल को चुभने वाले अलफ़ाज़ वहीँ हैं,
नहीं बदला कुछ भी, बिखर गया है सब कुछ फिर भी,
मैं इस बिखरे हुए ख़त के पुरजो से परेशान हूँ........


Thursday, September 27, 2012

अब मेरी ज़रूरत नहीं, तो ना सही. ....

रेत पर निशाँ पड़े थे हमारे,
मेरे निशाँ कुछ नहीं, तो ना सही.
लहरों पर आंसूं बहे थे हमारे,
मेरे आंसू कुछ नहीं, तो ना सही.
ज़रूरत थी कभी एक दुसरे की हमको,
अब मेरी ज़रूरत नहीं, तो ना सही.....

पत्तों के पीछे चेहरे छुपे थे हमारे,
मेरा चेहरा कुछ नहीं, तो ना सही.
साथ चल के रस्ते बनाये थे,
मेरा साथ कुछ नहीं, तो ना सही.
ज़रूरत थी कभी एक दुसरे की हमको,
अब मेरी ज़रूरत नहीं, तो ना सही.....

आहटें सुनी थी हमने साथ मे,
मेरी आवाज़ कुछ नहीं, तो ना सही.
इंतज़ार किया था साथ में,
मेरा इंतज़ार कुछ नहीं तो ना सही.
ज़रूरत थी कभी एक दुसरे की हमको,
अब मेरी ज़रूरत नहीं, तो ना सही......

Friday, September 21, 2012

वो कश्ती बहुत हिलती है.......





वो कश्ती बहुत हिलती है, 
जैसे उसमें सब बिखरा बिखरा सा है.
रह रह कर याद आता है मुझको,
शायद वो नाम सुना सुना सा है.
अंगारे तो मेरे पैरों मे बंधे हैं,
दिल की जलन की वजह क्या है.
ख्वाहिशों से घिरी गर हो ज़िन्दगी,
तो उस जीने का मतलब क्या है....


मैं और तुम........

शाम की तरह जैसे आ गए हो तुम,
मुस्कुरा रहे हो खिलती चांदनी से तुम.
दस्तकें जो दी तुमने दिल के द्वार पे,
झुक गया ये आसमान भी इतने प्यार से.
चली गयी है लहरें भी थक हार के,
और रह गए हो मेरे पास बस एक तुम.

सोचती हूँ ऐसा क्या हुआ है मुझे,
लिख रही हूँ क्यों, क्यों है शब्द बंधे हुए.
ढूंढ लूँ सारे मोती जो है कहीं छुपे हुए,
चुरा लूँ सारे पल जो हैं तुमसे जुड़े हुए.
शोर मे भी आज है ख़ामोशी सिली हुई,
और खो गए है एक दुसरे मे मैं और तुम......... 

Wednesday, September 12, 2012

मेरा दिल भी द्रौपदी हो गया........


वो हर शाम, हर रोज़ आया,

उसका आना जाना अफसाना हो गया.
रोज़ रोज़ थक के सो जाना,
मेरा इंतज़ार पुराना हो गया.
मायूसियों से घिरे पल काट काट के,
मेरा दिल भी द्रौपदी हो गया.

ना वक़्त आया, ना वक़्त बदला,
ना वो कभी रूप बदल के आया.
अंतहीन गहराइयों मैं भी न कभी पड़ा उसका साया,
कशमकश से उलझती  साँसों से,
मेरा मन धुआं हो गया.
मायूसियों से घिरे पल काट काट के,
मेरा दिल भी द्रौपदी हो गया........

Saturday, August 4, 2012

ये घर है यहाँ आराम है.....

ये घर है यहाँ आराम है,
लौ देता उनको जो बेजान हैं.

कश्मकश से दूर,
परेशानियों से बेखबर,
इसकी यही तो पहचान है.
लोरी सुनाता,
और कभी डांटता, 
इसकी खुद की एक जुबान है.
ये घर है यहाँ आराम है,
लौ देता उनको जो बेजान हैं.

अँधेरे उजालों के बीच खेलता,
कभी गन्दा होता सफाई के लिए रोता,
इसको खुद का भी बहुत ध्यान है.
यहाँ वहां चीज़ें छुपाता,
लाखों राज अपने अन्दर दबाता,
किसी से कुछ न कहता,
भावनाओं का इसको बड़ा सम्मान है.
ये घर है यहाँ आराम है,
लौ देता उनको जो बेजान हैं.

हजारों रूप बदलता,
समय के साथ ढलता,
लोगों के साथ जीता,
और उनके साथ मरता,
नन्हे से जीवन को आसरा देता,
आखिर इसको भी तो बड़े काम हैं.
ये घर है यहाँ आराम है,
लौ देता उनको जो बेजान हैं.

Friday, August 3, 2012

गहरी है वो बस गहरी है............

गहरी है वो बस गहरी है,
उसमे शोर का कोई चिन्ह नहीं.
उसमे जीवन की कोई चाह नहीं,
आदि है सिर्फ, कोई अंत नहीं.
खड़ी है बस सहारे से,
डह जाएगी एक इशारे से.
वो विशाल है, एक काल है,
उसकी छांव का कोई अर्थ नहीं,
खुद बन जाए इतनी समर्थ नहीं.
गहरी है वो बस गहरी है,

उसमे शोर का कोई चिन्ह नहीं....





Thursday, July 19, 2012

ज़िन्दगी भी अब जिद पर आ गयी है......



ज़िन्दगी भी अब जिद पर आ गयी है,
कहती है आखिरी सांस तक लडूंगी.
अरमान बहुत है इस दिल मैं,
सारे अरमानो को पूरा करुँगी.
पंख काट देने से पंछी उड़ना नहीं भूल जाते,
जज्बे के दम पर आसमान छु कर रहूंगी.
मेरे हौसलों पर शक करने वाले अंत,
तुझे भी मै जीने का मतलब सिखा के रहूंगी.



Thursday, July 5, 2012

तुम खुद जगना भूल गए......



नन्ही उंगलियाँ पकड़ के मुझे चलना सिखाया,

और खुद उड़ना भूल गए.
तुतली जबान को मेरी तुमने अक्षर दिए,
और खुद बोलना भूल गए.
घोंसले को तुमने तिनके से ढका,
और आसरा लेना भूल गए,
मुझे ख्वाबों के जंजाल में फंसा कर,
तुम खुद जगना भूल गए......

Wednesday, June 27, 2012

मैंने तो बचपन से खुश रहना सीखा था........



मैंने तो बचपन से खुश रहना सीखा था,

तूने मुझे उदासी का मतलब सिखा दिया.
टूटी हर चीज़ को मैंने जोड़ना सीखा था,
तूने मुझे बिखरे हुए का मतलब बता दिया.
मेरी ख्वाहिशें मेरी ज़रूरतों से बड़ी कभी नहीं थी,
तूने मुझे ऊँचाइयों का रास्ता दिखा दिया.
मेरी नाकामियों के पीछे मैंने अच्छाई खोज ली थी,
तुने मेरी अच्छाई को मेरी नाकामियों का बहाना बना दिया.....

Sunday, June 24, 2012

जी करता है पैरों के सारे बंधन तोड़ दूँ........



जी करता है पैरों के सारे बंधन तोड़ दूँ,

जो बनाये है रिश्ते सालों मे उन्हें खुला छोड़ दूँ.
खो जाऊ उस आकाश में जहाँ सिर्फ आशाएं बसती हैं,
और उन्हें पूरी करने की उम्मीद छोड़ दूँ.
उड़ जाऊ वहां, जहाँ समझने समझाने के फ़र्ज़ न हो,
बना लूँ अपना वहां एक जहां, जहां जीने मरने की कोई शर्त न हो........

Sunday, June 17, 2012


हमे तो बचपन से मशहूर होना का शौक था, 

आपकी सोहबत मे हमने रुसवा होना सीख लिया.....

आसमान मे एक भी सुराग न कर सके हम,
लेकिन उस दर्द के साथ जीना सीख लिया......

Tuesday, May 29, 2012

Mere jaise laakhon hai tumhare paas...........



Mere jaise laakhon hai tumhare paas,
Mere paas bas ek ho tum.
Bahane khush rehne ke hazaron hai tumhare paas,
Meri khushi ka ek hi bahana hai wo ho tum.
Sau ummeden hai tumse, tumko ghere har pal,
Meri jeene ki ek hi ummed hai wo ho tum.
Tumhare har ek pal se kai kal jude hain,
Mere kal ke har ek pal se jude ho to bas ek tum…..

Haan yahi Zindagi hai....



Dhuyein aur halle ke beech se nikal rahi hai,

Beh rahi hai, Chilla rahi hai.
Kabhi hans ke to kabhi mayusi se seh rahi hai,
Sabse keh rahi hai.
Dil behlaane ke liye sahara leti,
Bogh ke neeche dab rahi hai.
Tufaanon ke beech lau liye jaise shanti
Ki ummed kar rahi hai.
Gir ke baar baar uthti wo jeene ki
Tamanna rakh rahi hai
Haadson ke silsile ko dekh wo mann
Hi mann muskura rahi hai
Puch rahi hai, Kya yahi zindagi hai,
Haan yahi Zindagi hai…….

kaun ho tum....


KYUN BHAR UTH TA HAI YE DIL USKE NAAM SE,
KHUSHI HAI, DARD HAI, GUSSA HAI YA JALAN.
KHINCHTI CHALI JAA RAI HUN MAIN AUR TUMHARI ORE,
ISSE PYAAR KAHO YA KAHO MERA PAGAL PAN.
KYA HO TUM MERE DIL KA SABSE MEETHA DARD,
YA HO USKI SABSE KHOOBSURAT DHADKAN.
MERI SAANSON KE SAATH CHALNE WAALE,
MUJHE ITNA BATA DO KAUN HO TUM.

KITNI AJJEB HAI YE SHANTI,
KITNA AJEEB HAI YE SUNAPAN.
MERE DIL KI GAHRAIYON MAI KABHI UTAR KE DEKHNA,
KITNA BHARA BHARA HAI YE KHALIPAN.
KUCH BHI PURA NAI HAI TUMHARE BINA,
KHUD TO HAARA HAI FIR BHI NAI HAI KOI GUM,
FIR BHI NAI HAI MERI AANKHEN NUM,
MUJHE BAS ITNA BATA DO KAUN, KAUN HO TUM…….

Mujhe matlab nahi....


Suraj main agar garmi hai to mujhe uski raakh se matlab nahi,
Chand main agar daag hai to mujhe uski badsurti se matlab nahi.
Gehre paani mai agar kai hai to mujhe uski chiknai se matlab nai,
Sahi gar maine kiya to mujhe rusvai se matlab nai…….

Matlab hai to us ehsaas se jiski garmi se rakh ban gayi,
Matlab hai to us pyaar se jiski badsurti dil ko chu gayi.
Matlab hai to un palkon se jisme aansuon ki kai ban gayi,
Matlab hai to us ihsq se jiski ruswai se zindagi ban gayi……………..



Hum kitne hoobahu ek , humshakal se lagatein hain,
Kahin hamara naam aur imaan ek to nahi.
Hamari aadatein aur baatein kitni mail khati hain,
Kahin hamari manzilon ka rasta ek to nahi.
Kitna apna aur pehchana sa lagata hai tumhara ehsaas,
Kahin hamari unliyon ke nishaan ek to nahi.
Mera majhab puchne ke pehle zara dekh lo mere rafiq,
Hamare khoon ka rang kahin ek to nahin……

Wo purana ghar....


Wo purana ghar aaj bhi darawana lagata hai,
Jaise ateet ke haadson ko ab bhi chupaye baitha hai.

Deewaron ke rang, uski chaya aur bhi dhundli pad gayi,
Fir bhi keewadon ki ore nazarein gadaye baitha hai.

Aangan ki matti se pairon ke nishaan gayab ho gaye,
Phool patte bhi saare murjha ke so gaye.

Koi nahi hai ab jo uske andar jhaanke,
Wo purana ghar shayad ab bhi kisi ke aane ki ummeed lagaye baitha hai…

Main kya sachmuch itni badi ho gayi...???


Bholi Bhali si meri hansi muskurahat mai badal gayi,
Udaasi na jaane kab gusse mai badal gayi.
Waqt ke saath chhoti chhoti hasratein zaruraton mai badal gayi,
Main kya sachmuch itni badi ho gayi..

Baalon ki ulghane shaley main badal gayi,
Aazadi kab zimmedari mai badal gayi.
Bachpan ki harkatein bhi ab peeche reh gayi,
Main kya sachmuch itni badi ho gayi..

Meri baatein unki baton se badi ho gayi,
Meri aadatein unki aadaton se alag ho gayi.
Jis god main bachpan se kheli wo god chhoti ho gayi,
Ya main sachmuch itni badi ho gayi……………

Monday, May 28, 2012

मैं क्या सचमुच इतनी बड़ी हो गयी...??????


भोली भली सी मेरी हंसी मुस्कराहट में बदल गयी,
उदासी जाने कब गुस्से मे बदल गयी.
वक़्त के साथ छोटी छोटी हसरतें ज़रूरतों मे बदल गयी,
मैं क्या सचमुच इतनी बड़ी हो गयी.

बालों की उलझनें शैली मैं बदल गयी,
आज़ादी कब जिम्मेदारी मे बदल गयी.
बचपन की हरकतें भी अब पीछे रह गयी,
मै क्या सचमुच इतनी बड़ी हो गयी.

मेरी बातें उनकी बातों से बड़ी हो गयी,
मेरी आदतें उनकी आदतों से अलग हो गयी.
जिस गोद मे बचपन से खेली वो गोद छोटी हो गयी
या मैं सचमुच मे इतनी बड़ी हो गयी.......